भारतस्य युवानां परिश्रमस्य समर्पणस्य च तालीवादनं कुर्वन् संस्कृत सुभाषितम् निरंतर प्रयास और साधना से हमारी प्रतिभा और निखरती है। आज हमारे युवा इन्हीं गुणों को आत्मसात कर दुनियाभर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते । तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति ॥